सफेद सुण्डी‌ – पहचान, नियंत्रण उपाय

सफेद सुण्डी‌  ( सफेद सुंडी White Grub )
पहचान –

भृंग का आकार 7 मी.मी.चौडा और 18मी.मी.लंम्बा होता हैं। सफेद सुण्डी‌ सफेद, इल्ली या   White Grub सफेद रंग के होते है।

पूर्ण विकसित इल्ली का शरीर मोटा, रंग मटमैला-सफेद , अंग्रेजी के ‘सी’ अक्षर जैसे मुडा हुआ होता है।

जिनका सिर गहरा भूरे रंग का तथा मुखांग मजबूत होते है।

काइटिन कवच वाले होते है इन्हें स्क्रैब बिटल भी कहते हैं यानी केकडे जैसे दिखने वाले किडे।

सफेद सुण्डी‌

स्क्रैब बीटल White Grub की लगभग 30,000 प्रजातियां पाई जाती है।
विभिन्न प्रजाति के लार्वा कम- अधिक मात्रा में पौधों को नुकसान पहुंचता है।

स्क्रैब बीटल यानी गोबर कीड़े White Grub की एक प्रजाती (स्क्रेबस सैकर) को मिस्र मे सूर्य देवता के प्रतिनिधि के तौर पे पवित्र माना जाता है।

उन्होंने इसे सूरज के गेंद को धक्का देने वाले देवता का प्रतीक माना।

वास्तविक व्हाइट ग्रब फिलोफेगा नामक परिवार के स्क्रैब होते हैं।

इन की लगभग 900 प्रजातियां होती है।

इनमें से लगभग 200 पौधों के लिए विशेष नुकसान कारक मानी गई है।

फिलोफेगा परिवार के सदस्यों को मई बिटल,जुन बिटल भी कहा जाता है।
सफेद सुण्डी‌ (सफेद सुंडी) लगभग हर तरह के पौधों के जड़ों को अपने भोजन की तरह प्रयोग कर सकता है।

जून बीटल घास कुल के पौधे यानी मक्का, बाजरा इत्यादि को ज्यादा पसंद करता है।

मूंगफली ,आलू ,कपास, दलहन, गन्ना, बैंगन, कद्दू वर्गीय फसलें, मूंग आदि तथा जल्दी बोल गई रबी फसलें व्हाइट ग्रब का शिकार बन सकती है।

प्राकृतिक रूप से व्हाइट ग्रब White Grub नीम, बेर, जामुन, बबूल, इमली, फारसा, करवंदा, अंजीर इस पेड़ पर आश्रित होते हैं।

परंतु मुख्य तौर पर नीम, सुरजना, इमली इन्हें खास पसंद होते हैं।

इसका जीवन चक्र 1 साल में पूरा होता है।

जबकि स्क्रैब बिटल के कई प्रजातियों का जीवन चक्र 3 से 4 साल का समय लगता है।

मई-जून के महीने में संध्या काल में निचेषण उपरांत मादा भूमि में 1 इंच से 8 इंच गहराई पे एक बार में 15 से 20 अंडे देती है।
एक सीजन में मादा 60 से 75 अंडे देती है।

वयस्क बीटल को बड़े पेड़ों की पत्तियां प्रिय है इसलिए यह पेड़ों के आसपास ज्यादा अंडे देती है, खासतौर पर नीम, बबूल, इमली के पेड़ों के नीचे।

अंडे से लार्वा White Grub निकलने के लिए लगभग 3 हप्तों का समय लगता है।

अंडे से निकलने के बाद लार्वा पौधे के सडते हुए अंश और जड़ों को खाकर अपनी लंबाई और वजन 5 गुना तक बढ़ाता है।

ठंड आने के पहले दो बार मोल्टिंग की क्रिया होती है।

तिसरी लार्वल अवस्था लगभग 9 महीने की होती है जिसके बाद फ्युपा अवस्था आती है।

ठंड आने पर लारवा जमीन में लगभग डेढ़ मीटर तक गहराई में जात है, और बसंत आने का इंतजार करता है।

बसंत आने के बाद वह फिर से बाहर आकर फसलों का और ज्यादा नुकसान करता है

परिपक्वता के समय यह ग्रब अपने चारों ओर मिट्टी का कवच बनाकर प्युपा अवस्था में चले जाते हैं,

जिससे कुछ हफ्तों में अंततः वयस्क कीट मे परिवर्तित हो जाते है यानी मई-जून आने तक जमीन में छिपे रहते हैं।

सफेद सुण्डी‌ (सफेद सुंडी) नियंत्रण-

1. कृषीगत नियंत्रण

गर्मी में खेत की गहर जुताई एवं सफाई करके कीड़ की सुप्त अवस्था तोड़ दे।

यांत्रिक नियंत्रण – प्रकाश प्रपंच के सहायता से प्रौढ़ किटक को इकट्ठा करके नष्ट करें।

White Grub सफेद सुण्डी‌

White Grub सफेद सुंडी

White Grub

2.जैविक नियंत्रण

बवेरिया बेसियाना और मेटरहिजियम एनीसोपली 5 किलोग्राम को गोबर की खाद केंचुए की खाद (2.5किलो) के साथ मिश्रण करके खेत में फैला दो।

3.रासायनिक नियंत्रण

भूमि में फोरेट 10 जी 25 कि.ग्र./हे. के हिसाब से बुवाई के समय खेत में मिला दे

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