अन्न सुरक्षा के प्रिसीजन फार्मिंग ( precision farming in India )

उर्वरकों का आविष्कार और सही इस्तेमाल करके पारंपरिक खेती की तुलना में फसलों की उत्पादकता में वृद्धि करना प्रिसिजन फार्मिंग  ( precision farming in  India ) के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। विश्व के सामने अन्न सुरक्षा का बहुत बडा ( food security in india ) संकट हैprecision farming in India

सुपर कंप्यूटरों, उपग्रहों, स्मार्ट उपकरणों, सूचना प्रौद्योगिकी आदि का उपयोग करके कृषि में सुधार करना, सही समय पर और सही जगह पर कृषि आदानों का उपयोग करके स्थायी उत्पादन को बढ़ाना है।

पारंपरिक खेती का उत्पादन बढ़ाने, फसलों की गुणवत्ता बढ़ाने, ऊर्जा संरक्षण और सूचना, प्रौद्योगिकी और प्रबंधन को एकीकृत करके पर्यावरण का संरक्षण करने के लिए प्रेसीजन फार्मिंग की जरूरत है।

प्रकृति के अतिक्रमण के बिना उपलब्ध संसाधनों के उपयुक्त इस्तेमाल के माध्यम से मानव की जरूरतों को कैसे पूरा किया जा सकता है।

इसके बुनियादी सिद्धांतों पर प्रिसिजन फार्मिंग (precision farming in India) होती है।

भारत जैसे विकासशील देशों में गरीब छोटे किसानों को स्थायी आय प्रदान करने में प्रिसिजन फार्मिंग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

प्रिसिजन फार्मिंग (precision farming in India) का उद्देश्य कृत्रिम रूप से इसका उपयोग करके उत्पादन लागत को कम करना है ।

कृषि उत्पादन में स्थिरता लाना है।

जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाओं, श्रम की कमी, रसायनों के भारी उपयोग आदि के कारण कृषि संकट में है।

कृषि के सामने कई समस्याएं हैं जैसे कम उत्पादकता, प्राकृतिक संसाधनों का नुकसान।

कृषि पर निर्भर एक बड़ी आबादी पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।

भूख और भुखमरी जैसी समस्याएं मानव जाति को त्रस्त कर रही हैं।

दुनिया की आबादी सात सौ मिलियन से अधिक है।

इतनी बड़ी आबादी को खिलाने, अन्न सुरक्षा ( food security in india) के लिए आने वाले वर्षों में प्रिसिजन फार्मिंग के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

सामग्री और उपकरण

  • ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS)

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जीपीएस किसी भी स्थान के अक्षांश और देशांतर को प्राप्त करने में मदद करता है।

स्थान निर्धारण के साथ मिट्टी की जानकारी जैसे कि मिट्टी के प्रकार, कीटों की जानकारी, बढ़े हुए खरपतवारों आदि को जीपीएस की मदद से किया जाता है।

  • सेंसर तकनीक(sensor technology)

विद्युत चुम्बकीय, कण्डक्टीविटी, अल्ट्रासाउंड,फोटोइलेक्ट्रिकिटी आधारित सेंसर तकनीक से

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आर्द्रता, वायु की गति, बाष्प की मात्रा, तापमान, वनस्पति विकास आदि को समझने में मदद मिलती है।

रिमोट सेंसिंग तकनीक फसलों की किस्मों, उनके द्वारा बनाए गए तनाव कीटों और उनकी पहचान, सूखे जैसी स्थिति की योजना, भूमि और फसल की स्थिति को समझने में मदद करती है।

बिना प्रयोगशाला के सेंसर की मदद से व्यापक डेटा विश्लेषण उपलब्ध है।

उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण करके, किसानों के लिए फसल योजना करना आसान है।

  • भौगोलिक सूचना प्रणाली ( geographic information systems)

जीआईएस हार्डवेयर सॉफ्टवेयर के संयोजन का उपयोग करके

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एक विशिष्ट विधि से जानकारी इकट्ठा करने, भंडारण, पुनर्प्राप्ति, स्थानिक जानकारी, भौगोलिक स्थिति और जानकारी इकट्ठा करने के लिए एक विकसित पद्धति है।

जीआईएस नक्शे एक स्थान पर संग्रहीत किए जाते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर वे आसानी से उपलब्ध हों।

संग्रहीत जीआईएस नक्शे पारंपरिक मानचित्रों की तुलना में अलग हैं।

इसमें फसल की उत्पादकता, मृदा सर्वेक्षण, वर्षा की गती, फसलों, मिट्टी की उर्वरकता, कीटों आदि की जानकारी शामिल है।

  • ग्रिड मृदा नमूना और परिवर्तनीय दर प्रौद्योगिकी

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परीक्षण रिपोर्ट को एक जीआईएस मानचित्र पर एक कंप्यूटर की मदद से बड़े पैमाने पर खेत में या पूरे गांव के ग्रिड में मिट्टी के नमूने इकट्ठा करने पर रिकॉर्ड किया जाता है।

कंप्यूटर जीआईएस नक्शे का उपयोग कृषि में कीटनाशक के इस्तेमाल के परिमाण को नियंत्रित करने के लिए जीपीएस सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है।

  • फसल प्रबंधन

उपग्रह की जानकारी किसानों को फसल, भूमि की स्थानीय संरचना के बारे में समझने में मदद करती है।

इस जानकारी के आधार पर किसान बीज, उर्वरक, दवाई, खरपतवार, पानी आदि जैसे इनपुट का उपयोग कर सकते हैं।

जो सही समय पर और सही जगह पर कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  • दर नियंत्रक( rate controller)

स्वंयचालित प्रणाली के माध्यम से फसल को उर्वरक प्रदान करने के लिए विभिन्न दर नियंत्रक संयंत्रों का उपयोग किया जाता है।

  • सॉफ्टवेयर (software)

विभिन्न कृषि गतिविधियों को करने के लिए सॉफ्टवेयर का उपयोग शामिल है।

सॉफ्टवेयर का उपयोग विभिन्न संगठनों से जानकारी का विश्लेषण करने and जीआईएस आधारित मानचित्र बनाना है।

सभी प्रक्रियाओं की प्रतिकृति के माध्यम से किसानों तक जानकारी प्रसारित करने के लिए किया जाता है।

प्रिसिजन फार्मिंग का अवलंब करके हम अन्न सुरक्षा ( food security in India ) के संकट को परास्त कर सकते है

precision farming in India के बारे मी अधिक यहा पढे

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