किसानों का इन्कम डबल करेगा राष्ट्रीय बांस मिशन

भारत सरकार ने अक्टूबर 2006 में ने  राष्ट्रीय बांस मिशन  शुरुआत की। मिशन के तहत महाराष्ट्र में अटल बंबू समृद्धि योजना  लागू हो गई हैं। यहां पर आज हम National bamboo mission जानकारी लेंगे।

चीन विश्व का सबसे बड़ा बंबू का उत्पादन करने वाला देश है। सन 2011 में बंबू का व्यापार लगभग 100000 करोड से भी ज्यादा था।

भारत में लगभग 9.57 मिलियन हेक्टर पर बंबू हो गया जाता है। कुल जंगल क्षेत्र में यह 12.8 प्रतिशत है।

बंबू का पहले पेड़ों tree की सूची में समावेश था। अब सरकार ने उसे पेड़ों की सूची से हटाकर घांस grass में समावेश किया है।

बंबू को काटने में होने वाले दिक्कत उसे घांस के श्रेणी में समावेश होने के बाद नहीं रहेगी।

बंबू भारत के लगभग सभी जंगलों में पाया जाता है। उसका बहुमुखी उपयोग के कारण भारत भर में उसे हरे सोने (Green gold) के रूप में जाना जाता है।

भारत में बंबू का व्यापार लगभग 26000 करोड का है। ग्रामीण क्षेत्र में बंबू द्वारा बहुत बड़े रोजगार उत्पन्न होने की संभावना है।

National bamboo mission

  • सरकारी तथा किसानों के जमीन पर बंबू रोपण क्षेत्र में वृद्धि करना।
  • बंबू कटाई के बाद प्राथमिक संस्करण सुविधा में सुधार करना।
  • बंबू इंडस्ट्री को पुनर्जीवित करना।
  • बाजार के मांग अनुसार संशोधन क्षेत्र को मदद करना, बंबू संस्करण के लिए छोटे-छोटे बिजनेस मॉडल विकसित करना।
  • मार्केट की डिमांड के अनुसार कौशल्य विकास, क्षमता निर्माण करने के लिए जागरूकता पैदा करना।
  • फर्नीचर उद्योग के लिए हमें जो बंबू आयात करना पड़ता है उसे कम करना।
  • बंबू उद्योग को बढ़ावा देकर ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार अवसरों को बढ़ोतरी करना

National bamboo mission output

किसान खेत के मेड़ पर बंबू लगा कर अपनी आय को बढ़ा सकते हैं।

पंतप्रधान नरेंद्र मोदी जी के 2022 तक किसानों की आय दुगना करने के मिशन में बंबू महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

छोटे और सीमांत किसानों को साथ में भूमिहीन और मजदूरों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होकर उनकी उपजीविका सुलभ होने में मदद होगी।

बंबू हाउ में से कार्बन डाइऑक्साइड लेकर उसे जमीन के अंदर स्थापित करता है। वातावरण में बढ़ते कार्बन डाइऑक्साइड से ग्लोबल वार्मिंग का खतरा हमारे सर पर मंडरा रहा है।

वातावरण से बंबू कार्बन डाइऑक्साइड लेता है। ग्लोबल वार्मिंग को कम करने में बंबू महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


अन्न सुरक्षा के लिए प्रेसीजन फार्मिंग

ग्लोबल वार्मिंग कारण, उपाय


  • बंबू की खेती के क्षेत्र में 105000 हेक्टर बढ़ोतरी करना
  • बांस से तैयार होने वाले प्रोडक्ट उपयोग करने के लिए बढ़ावा, छोटे बड़े प्रोसेसिंग यूनिट तैयार करके सप्लाई चैन स्थापित करना
  • ग्राहक बाबू के प्रोडक्ट आसानी से खरीद सके इसलिए मंडी बाजार या फिर ऑनलाइन ट्रेडिंग स्थापित करना
  • बंबू संशोधन व्यापार तकनीक विकसित करने के लिए देश के अंतर्गत विभिन्न संस्थाओं में संवाद सुस्थापित करना

 आर्थिक सहयोग

नेशनल बंबू मिशन आर्थिक सहायता केंद्र और राज्य सरकार द्वारा 60:40 रहेगी। केंद्र शासित प्रदेशों के लिए केंद्र सरकार 100% आर्थिक सहायता करेगी।

पहाड़ी राज्यों के लिए केंद्र सरकार 90% खर्च करेगी और राज्य सरकार 10% योगदान देगी।

संस्था , स्वयं सहायता समूह, महिला समूह लाभार्थियों के लिए सब्सिडी 100% होगी। सब्सिडी पहले साल 50% दूसरे साल 25% और तीसरे साल 25% मिलेगी।

प्रति हेक्टर सब्सिडी कि रासी 42000 होगी। लाभार्थी को 4 हेक्टर सीमा तक लाभ मिलेगा।

किसानों को निजी जमीन पर बंबू फसल के लिए 42000 ड्रिप सहित ड्रिप सहित प्रति हेक्टर मर्यादा में अनुदान राशि दी जाएगी।

अधिकतम क्षेत्र मर्यादा 4 हेक्टर की होगी। अनुदानित राशि 3 सालों में तीन समान किस्तों में दी जाएगी।

Start up India स्टार्टअप इंडिया

नव उद्यमियों के लिए स्टार्टअप इंडिया मिशन के तहत और नेशनल बंबू मिशन के अंतर्गत सब्सिडी मुहैया करायी जाती है।

राष्ट्रीय बांस मिशन तकनीकी सहायता संघ

National bamboo mission को तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए भारत सरकार द्वारा bamboo technical support group बनाया गया है।

तकनीकी संघ में 3 संशोधन संस्था सदस्य होंगे।

  • Cane and bamboo technology center, guwahati

  • Indian council of forest research and education, dehradun

  • Kerala Forest research institute, Peechi

यह संशोधन संस्था सभी राज्यों को मिशन सफलतापूर्वक पूरा करने में तकनीकी सहयोग प्रदान करेगी। साथ में इंटरसेक्टरल शोधन के लिए बढ़ावा देगी।

 वेबसाइट

नेशनल बांस मिशन लाभ लेने के लिए आप उनके अधिकृत वेबसाइट https://nbm.nic.in/ लॉग ऑन करके रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

वेबसाइट पर आप मिशन के बारे साारी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आधार नंबर और बैंक डिटेल्स  भरकर आपको अपना रजिस्ट्रेशन पूरा करना होगा।

National bamboo mission बारे में अंग्रेजी में जानकारी आप यहां पढ़ सकते हैं।

bamboo product

National bamboo mission atal Bamboo samriddhi yojana
Source- www.bambooimport.com
  • फर्नीचर बनाने में बांस का अच्छी तरह से उपयोग किया जाता है।
  • हैंडीक्राफ्ट और ज्वेलरी बनाकर अच्छी खासी आमदनी की जा सकती है।
  • बंबू अब प्लास्टिक के पर्याय के रूप में उभर कर आ रहा है।
  • कंस्ट्रक्शनमें भी स्टील की जगह बंबू का उपयोग किया जा रहा है।
  • इको फ्रेंडली बोतले बनाने में भी बंबू का प्रयोग हो रहा है।

बंबू की खेती से कितना होगा इनकम

भारत के पंतप्रधान नरेंद्र मोदी जी का जो सन 2022 तक किसानों का इनकम डबल करने का सपना है उसमें राष्ट्रीय बांस मिशन तथा बास की खेती महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

खेती से यूं तो अनगिनत इनकम हो सकता है। अगर आप सिर्फ रॉ बंबू कंपनी को बेचेंगे तो आपको कम मुनाफा होगा।

महाराष्ट्र के जालना जिले में श्री गणेश अंभोरे अपनी बंबू की खेती बारे में बताते हैं कि उन्हें हर साल 1 एकड़ खेती से रुपए 100000 से ज्यादा इनकम आता है।

यह इनकम गन्ने की खेती से भी ज्यादा है। हम आपके लिए श्री गणेश अंभोरे जी का वीडियो साझा कर रहे हैं। यह वीडियो मराठी में है समझने में थोड़ी दिक्कत होगी।

[embedyt] https://www.youtube.com/watch?v=9vUemn_pAIc[/embedyt]

प्रोसेसिंग यूनिट को आर्थिक सहयोग

सरकार किसानों को बंबू की खेती करने के लिए सब्सिडी दे रही है। साथ में ही ग्रामीण क्षेत्रों में बंबू संस्करण यूनिट शुरू करने के लिए भी आर्थिकी रूप में सब्सिडी उपलब्ध करा रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में प्रोसेसिंग यूनिट यूनिट शुरू होने पर ग्रामीण लोगों को रोजगार भी उपलब्ध होगा। किसानों को बंबू बेचने के लिए बाहर के लोगों पर निर्भर नहीं रहना होगा।

किसानों की आय तो बढ़ेगी ही तथा युवकों को फैक्ट्री में रोजगार उपलब्ध होने के कारण एक प्रकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति प्राप्त होगी। 

Subsidy 

संशोधन व विकास

बांस के संशोधन तथा विकास के लिए मिशन के तहत सरकारी संशोधन संस्था के लिए 10000000 रुपए तक सहायता की जाएगी।

प्लांटेशन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट

पौधरोपण बुनियादी ढांचा विकास क्षमता निर्माण करने के लिए नर्सरी स्थापित करने के लिए और क्षेत्र विस्तार के लिए सब्सिडी दी जाएगी।

नर्सरी

तीन प्रकार की नर्सरी स्थापित करने के लिए रु 10 लाख से लेकर 40 लाख तक सब्सिडी दी जाएगी।इसमें हाईटेक नर्सरी टिशू कल्चर नर्सरी का समावेश है।

क्षेत्र विस्तार ( bamboo plantation )

सरकारी जमीन पर बांस रोपण के लिए प्रति हेक्टर ₹42000 और किसानों की निजी जमीन पर रोपण के लिए प्रति हेक्टर ₹30000 सब्सिडी दी जाएगी। सब्सिडी 3 साल में तीन किस्तों में किसानों के लिए उपलब्ध होगी।

Farmer Registration

किसान राष्ट्रीय राष्ट्रीय बांस मिशन में शामिल होने के लिए  https://nbm.nic.in/

इस वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होगा। सीधे रजिस्ट्रेशन पेज पर जाने के लिए  यहां क्लिक करें। आपके सामने नीचे देव है फोटो की तरह एक विंडो ओपन हो जाएगा।

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Bamboo success story

महाराष्ट्र के पुणे शहर के नजदीक श्री योगेश शिंदे जी ने bamboo India बंबू प्रोसेसिंग का स्टार्टअप शुरू किया है। कंपनी की स्थापना 2016 में हुई।

Bamboo India कंपनी ने मात्र 3 साल में ही रुपए 3.50 करोड़ का टर्नओवर किया है। योगेश शिंदे किसानों से तथा आदिवासी लोगों से बंबू खरीदते हैं।

स्पीकर टूथब्रश साइकिल ऐसे प्रोडक्ट बनाकर उनका एक्सपोर्ट करते हैं। अमेरिका की नामांकित मॉल में bamboo India कंपनी द्वारा बनाए गए प्रोडक्ट ग्राहकों के लिए उपलब्ध है।


सभी राज्य अपने हिसाब से नेशनल बंबू मिशन को कुछ बदलाव करके योजना लागू कर रहे है।

महाराष्ट्र में यह मिशन अटल बांबू समृद्धि योजना के रूप में महाराष्ट्र सरकार ने लागू किया है।

atal Bamboo samriddhi yojana

अटल बंबू समृद्धि योजना का लाभ लेने के लिए आपको महाराष्ट्र बांबू विकास महामंडल संपर्क करना होगा।

अटल बांबू समृद्धि योजना national bamboo mission योजना के तहत किसानो को खेत और खेत के बांध पर बंबू के पौधे लगाए जाएंगे।

national bamboo mission का लाभ लेने के लिए किसान महाराष्ट्र बांबू विकास बोर्ड निर्धारित प्रारूप में ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन करना होगा।

अनुदान की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक अकाउंट ( dbt agriculture) में जमा की जाएगी।

4 हेक्टेयर से कम भूमि वाले किसानों को 1 हेक्टर की अधिकतम सीमा तक योजना में सब्सिडी दी जाएगी।

बांस एक बहुमुखी जंगलों में पाया जाने वाला पेड़ हैं और इसे हरे सोने के रूप में जाना जाता है।

देश में बांस का बाजार 26000 करोड हैं। इससे फर्नीचर जैसे उद्योग रोजगार अवसरों में बढ़ोतरी होगी।

इस बात को ध्यान में रखते हुए राज्य में टिशू कल्चर रोपाई का निर्माण किया जाता है।

किसान अपने खेत या खेत के बांध पर इसकी रोपाई करके अपने आय को बढ़ा सकते हैं।

महाराष्ट्र में मानवेल, कटांग और माणगा की बास की प्रजातियां पाई जाती है।

स्थानीय प्रजातियों के अलावा ५ से अधिक प्रजातियों का चयन किया गया है।

शासन निर्णय यहा पढे

 Video

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